राम से मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम तक
कार्तिक मास के कृषण पछ के अमावस्या के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम 14वर्ष के वनवास के पश्चात् अयोध्या को कुछ दानवों की मुक्ति करने के बाद लोटे थे। उनके इस दिन के पहले राम को वहां से लेकर चलते है जब सुप्रभात को राम का राज अभिषेक होने ही वाला था कि केकई के वचन अनुसार राम को 14 वर्ष का वनवास राजा दशरथ ने दे दिया परन्तु राम ने इसे सहजता से स्वीकार किया।और पिता की अज्ञानुसर उसका पालन किया। राम उसी समय संन्यासी का रूप लेकर व्हा से चल दिए तभी राजादेश अनुसार रथ के द्वारा राम को वनवास छोड़ने को कहा परन्तु राम ने सरयू नदी तक ही रथ को स्वीकार किया और उसके आगे का रास्ता स्वयं तय किया जहां पर उनके कोमल नगे पावं में छाले तक पड़े गए पर चहरे पर वही मुस्कान लिए चलते रहे। और एक साफ सा स्थान देखर वहां पर एक आश्रम बनाया। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और लक्ष्मण से सुपर्णखा से बेर कर रावण ने सीता का हरण कर लिया । और आगे का चिरत्त अगले भाग में।